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हमारा भारत महान

              हमारा देश भारत महान है , इसकी महानता  का जितना बखान की जाये कम है ,अपितु ये इसलिए नहीं  महान है कि, इसे सोने कि चिड़िया कहा जाता है या यहाँ कि धरती पर गंगा कि      अविरल धारा1124_obama_460x276 बहती है , इसलिए भी नहीं महान है कि यहाँ कि धरती पर अनेका नेक परम पूज्य महान आत्माओ ने जन्म लिया था और न ही इसलिए महान है कि यहाँ कि आबादी में बिभिन्न जाति   व धर्म के लोग एक साथ एकी ही अबो हवा मे रहते है .ये सब महानता कि बाते तो सदियों पुरानी है .

             आज कि तारिख मे हमारे भारत की महानता हमारी सरकार की उदारवादी मानसिकता पर  आंकी जानी   चाहिए . विश्व मे है कोई ऐसा देश – ऐसी उदारनीति सरकार  नहीं      जो अपने देश की जनता को , अपने देश के सपूतो को , अपने देश के किषानो को भूखा बिलखता व मरता छोड़ , दुश्मन देश के नुमाइंदों ( अपने देश के दुश्मनों ) को न सिर्फ अपने देश मे अपनी सुरख्या में पनाह देती है बल्कि उनके लालन पालन और रख रखाव में राष्ट्र की सम्पति मे से करोडो रुपये पानी की तरह बहा देती है .
            सन २००८ नवम्बर मुंबई आक्रमण के ‘स्ट्रिंग ओप्रेसन’ मे पकडे गए इकलौते आतंकवादी  ’ अजमल कसाब’ इस बात का ज्वलंत उदहारण है . बीते हुए इन कूल तिस महिनो में उसके रहने के लिए  मुंबई के  आर्थर रोड जेल में      तैयार किये गए बम निरोधक स्वतंत्र “ सेल” (बिशेस बम प्रूफ  चेम्बर   )  के निर्माण , उसकी सुरख्या – रख रखाव व खान पान में हमारी सरकार अब तक  ’ चालीस करोड़ ’ रुपयों से ज्यादा खर्च कर चुकी है , न जाने और कितने करोड़ खर्च करेगी   उस पर .
          लगभग दस वर्ष बीत चुके - नवम्बर २००१ के संसद  आक्रमन्न्कारियो  का   बड़े ही चाव से लालन पोषण कर रही है हमारी सरकार . जबकि इस कडवी सच्चाई से मुल्क का शायद ही कोई ब्यक्ति अनभिज्ञ होगा कि  देश कि धरती को अपने पसीने से सींच कर अन्न का उत्पादन करने वाले हमारे किशानभाई  सरकार कि बेरुखी कि वजह से ही नित दिन आत्महत्या करने पर विवश हो रहे है .  
         अब आप अमेरिका को ही ले लिजिये -कितना स्वार्थी है अमेरिका , अपने देश के लोगो का भरण पोषण का ज्यादा ख्याल रखती है, और ” बराक ओबामा ” का दिल तो कभी इतना बड़ा हो ही नहीं सकता कि अपने देश के दुश्मनों का पूरी सुरख्या और उदारता के साथ लालन पोषण करे वो भी अपने ही देश कि सरहद के भीतर ऐसे महान कार्य तो सिर्फ भारत ही कर  सकती    है .
        अब आप देख लिजिये ताज़ा “तरीन  ” ओबामा” की करतूत पाकिस्तान तक मे घुस कर “लादेन “  को उसने न  सिर्फ खोज निकला बल्कि एक ही झटके में ढेर भी कर दिया . तत्काल घोषणा भी कर दिया कि -आईन्दा अमेरिका  पाकिस्तान को ‘वित्त’ सहायता नहीं प्रदान करेगी .” भला ये भी कोई बात हुई  ?
        अमेरिका राष्ट्रपति ” बराक ओबामा ” को मेरी नशिहत है -”सहनशीलता यदि उसे सीखनी है तो हमारी भारत सरकार से सीखे .
       अब और देखिये  “2  G  स्पेक्ट्रम ‘ घोटाले के प्रमुख आरोपी   पूर्वतन केन्द्रिय टेलकम मंत्री   ए० राजा द्वारा “एक लाख छियत्तर हजार करोड़ ( 17600000000000 .००) रुपयों का देश को चुना लगाये जाने पर भी उसकी गिरफ़्तारी के लिए तब तक केंद्र सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया जब तक कि प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट का दबाव न पड़ा .
           ऐसे महान देश की महान सरकार  की  जितने गुणगान कि जाये कम है .
           मेरे इस लेख को पढने वाले किसी महानुभाव लेखक से मेरी गुजारिश है कि वो ‘हमारे भारत सरकार की महानता दर्शाते वाली एक ” सरकार चालीसा ” की रचना करे और उसका असर प्रचार कुछ इस तरह से करे कि नित दिन घर-घर उसका पाठ हो .
                                                      जय भारत सरकार की ……
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  by. Suraj Agrawal . Rourkela- Odisha        



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raashi malik के द्वारा
01/06/2012

type in big font and write less because it makes it boring to read

Miss Pooja के द्वारा
25/08/2011

इस देश के नेता भ्रष्ट हैं, आम आदमी की गाढ़ी कमाई के करोड़ों-अरबों रूपए डकार जाते हैं और उप्फ तक नहीं करते। लेकिन जब बात जनता की भलाई, आम आदमी के सरोकार की आती है, तो उनके खजाने में देश के लिए एक रूपया तक नहीं निकलता। पार्टी के चुनावों में खर्चे के लिए उनके पास करोड़ों रूपए हैं, विदेशों की यात्रा पर वे करोड़ों रूपए पानी की तरह बहा देते हैं, लेकिन जब बात आम आदमी के घर का चूल्हा जलाने की आती है, तो उनका बजट कम पढ़ जाता है। हाल ही में एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि भारत में अनाज की सुरक्षा के लिए सरकार के पास पैसे कम पड़ जाते हैं। ये खुलासा हुआ है फूड कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया की पिछले साल की एक खुफिया रिपोर्ट से पता चला है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के पास 608 लाख टन अनाज गोदामों में पड़ा था। रिजर्व स्टॉक के मुकाबले ये दोगुने से भी ज्यादा था। इसमें से करीब 30 लाख टन अनाज या तो सड़ चुका था या कुछ ही वक्त में सड़ने वाला था। मालूम हो कि सरकार कहती है कि उसके पास अनाज रखने के लिए गोदाम नहीं है। देश के कृषि मंत्री शरद पवार से पूछा गया कि आपके पास क्या अनाज रखने के लिए गोदाम भी नहीं हैं तो उनका जवाब था अनाज खुले में रखे सड़ रहा है। पैसा नहीं है कि नए गोदाम बनाए जाएं। सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर सबसे ज्यादा अनाज कहां बर्बाद हो रहा है? पिछले साल आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 70 लाख टन अनाज रखने की क्षमता बढ़ाने की योजना थी, लेकिन ये फुस्स हो गई। इस योजना पर आने वाली लागत 1500 से 2000 करोड़ रुपए थी, इतना पैसा सरकार के पास नहीं था। एफसीआई की रिपोर्ट ने साफ बताया है कि कैसे देश में हर साल लाखों टन अनाज बर्बाद होता है। खैर, इस पूरे मामलें में शरद पंवार से तो उम्मीद की नहीं जा सकती, वजह इसकी ये है कि वैसे तो वे देश के कृषि मंत्री है, लेकिन इसके साथ ही वे आईसीसी के अध्यक्ष है। चूंकि अभी कुछ महीनों तक विष्वकप चला और फिर उसके बाद आईपीएल ष्शुरू हो गया, तो पंवार साहब के पास कहां इतनी फुर्सत की ऐसे तुच्छ मामलों में ध्यान दे कि देश का अनाज काम में आ रहा है कि सड़ रहा है। भई, देश के आम आदमी से कहीं ज्यादा ध्यान तो क्रिकेट को दिए जाने की है ना। तो पवार साहब तो अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं ! रही बात पैसे की कमी की तो, वह भी तो सही है। आजकल ऐसी खबरें आ रही है कि पंवार साहब ने करोड़ो रूपए का निवेश किया है डीबी रिएल्टी में। देश की सबसे बड़ी दलाल के तौर पर सामने आई नीरा राडिया ने खुद पवार साहब पर ये आरोप लगाए हैं। अब अगर इन आरोपों में जरा सी भी सच्चाई हो, तो समझा जा सकता है कि पवार साहब के पास पैसे कहां से आएंगे।




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