जनजागरण अभियान

जनहीत-जनस्वार्थ एवं जनकल्याण हेतु

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Suraj Agrawal


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ज्वालामुखी

Posted On: 28 Aug, 2011  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सारे जंहा से अच्छा ह्हिंदुस्ता हमारा ?

Posted On: 27 Aug, 2011  
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मस्ती मालगाड़ी में

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जागो भारत जागो

Posted On: 15 May, 2011  
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जनादेश

Posted On: 21 Jun, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Suraj Agrawal Suraj Agrawal

आदरणीय सूरज अग्रवाल जी ! अच्छे लेख के लिए बधाई ! रेलभाड़े में वृद्धि का फैसला पिछली सरकार का था,जिसे मोदी सरकार ने लागू करने जा रही है ! समय के साथ साथ हर चीज और हर सेवा के दाम में वृद्धि हो रह है ! अत: घाटे में रेल को चलाना मूर्खता है ! सरकार को चाहिए की रेलवे को निजी हाथों में सौप दे ! इससे बिना टिकट यात्रा करने वालों पर रोक लगेगी ! गरीब किसान हर साल गन्ना,धान और गेहूं का खरीद मूल्य बढ़ाये जाने के लिए क्यों आंदोलन करता हैं ? इससे चीनी,गुड,चावल और आटा का दाम हर साल बढ़ता जा रहा है,उस और कोई क्यों नहीं ध्यान देता है ! गरीब आदमी के ट्रेन में न चढ़ने की बात भी सच्चाई से पर है,क्योंकि अधिकतर ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह नहीं होती है ! ट्रेन भाड़े में वृद्धि जायज है !सरकार ट्रेनों में भीड़ को देखते हुए नई ट्रेने चलाये और यात्री सुविधाओं में और वृद्धि करे !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

इस देश के नेता भ्रष्ट हैं, आम आदमी की गाढ़ी कमाई के करोड़ों-अरबों रूपए डकार जाते हैं और उप्फ तक नहीं करते। लेकिन जब बात जनता की भलाई, आम आदमी के सरोकार की आती है, तो उनके खजाने में देश के लिए एक रूपया तक नहीं निकलता। पार्टी के चुनावों में खर्चे के लिए उनके पास करोड़ों रूपए हैं, विदेशों की यात्रा पर वे करोड़ों रूपए पानी की तरह बहा देते हैं, लेकिन जब बात आम आदमी के घर का चूल्हा जलाने की आती है, तो उनका बजट कम पढ़ जाता है। हाल ही में एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि भारत में अनाज की सुरक्षा के लिए सरकार के पास पैसे कम पड़ जाते हैं। ये खुलासा हुआ है फूड कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया की पिछले साल की एक खुफिया रिपोर्ट से पता चला है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के पास 608 लाख टन अनाज गोदामों में पड़ा था। रिजर्व स्टॉक के मुकाबले ये दोगुने से भी ज्यादा था। इसमें से करीब 30 लाख टन अनाज या तो सड़ चुका था या कुछ ही वक्त में सड़ने वाला था। मालूम हो कि सरकार कहती है कि उसके पास अनाज रखने के लिए गोदाम नहीं है। देश के कृषि मंत्री शरद पवार से पूछा गया कि आपके पास क्या अनाज रखने के लिए गोदाम भी नहीं हैं तो उनका जवाब था अनाज खुले में रखे सड़ रहा है। पैसा नहीं है कि नए गोदाम बनाए जाएं। सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर सबसे ज्यादा अनाज कहां बर्बाद हो रहा है? पिछले साल आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 70 लाख टन अनाज रखने की क्षमता बढ़ाने की योजना थी, लेकिन ये फुस्स हो गई। इस योजना पर आने वाली लागत 1500 से 2000 करोड़ रुपए थी, इतना पैसा सरकार के पास नहीं था। एफसीआई की रिपोर्ट ने साफ बताया है कि कैसे देश में हर साल लाखों टन अनाज बर्बाद होता है। खैर, इस पूरे मामलें में शरद पंवार से तो उम्मीद की नहीं जा सकती, वजह इसकी ये है कि वैसे तो वे देश के कृषि मंत्री है, लेकिन इसके साथ ही वे आईसीसी के अध्यक्ष है। चूंकि अभी कुछ महीनों तक विष्वकप चला और फिर उसके बाद आईपीएल ष्शुरू हो गया, तो पंवार साहब के पास कहां इतनी फुर्सत की ऐसे तुच्छ मामलों में ध्यान दे कि देश का अनाज काम में आ रहा है कि सड़ रहा है। भई, देश के आम आदमी से कहीं ज्यादा ध्यान तो क्रिकेट को दिए जाने की है ना। तो पवार साहब तो अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं ! रही बात पैसे की कमी की तो, वह भी तो सही है। आजकल ऐसी खबरें आ रही है कि पंवार साहब ने करोड़ो रूपए का निवेश किया है डीबी रिएल्टी में। देश की सबसे बड़ी दलाल के तौर पर सामने आई नीरा राडिया ने खुद पवार साहब पर ये आरोप लगाए हैं। अब अगर इन आरोपों में जरा सी भी सच्चाई हो, तो समझा जा सकता है कि पवार साहब के पास पैसे कहां से आएंगे।

के द्वारा:

suraj ji main aap sabhi baato sahamat hun . is disha main aandolen bhi shi disha main ja raha tha . aap jisai mahno bhavo ki vajha sai jan jagrti bhi ho rahi thi .thi ka matlab yai nahi hain ki main nirash vaadi hun. ab janta bhi taiyaar hain . laikin hamri yai kya aadet ho gai hain .ham raster hit kai mudo sai hat kar or na samjkar charo kai pichai baag nai lagtai hain.midya hamain mana jagrti kar ti.par aap ko yai nahi lgta ki electronik midia hamian padati kam hain dikhati jadaa hain .likhnai ka matlab yai hain ki khin kalai dhan kai mudai sai dur kar naa to nahi chati mujhai yai lagtaa hain. ki ek muda hani jan lok pal ka. utha a hua hain . dusri or baba ram dev kalai dhan ka arth karnti ko lanai ki baat kartai hain aadi aadi. par mujai yai lagta hai .kuch sbhi nahi midya chanal kai duaraa ak charai sai dusrai charai ko ladnai ki kosis hain ya ak kai mudon ko dusrai kai mudo ko haranai kosis hani.kiya ak siref janlok pal kai mudai par desh main ban rahai alag alag har desh hit kai mudo kai khilaf jan aakrosh ko thanda kar daina kiya thik hoga .aapjantai hain bhali bhanti ki mojuda sarkar ki parti ka astitv lok pal sai khatam nahi ho sakta tha . is par vahai antim tak lolipop dainai main kamyab ho ja gi.lakin videsh main rakhai kalai dhan kai kholashai sai to mojoda sarkar ki parti ka aastitav hi katam ho jata . kyon ki congress ka matlab gandhi pari vaar.kisi bhi sarkar kai lia bhastachar khatem kar na aasan hai imandar kosis ki jai .par is bharmit karnai vaali midiya ka kiya karain. is ka pata hi nahi chal rahaa ya kis kai sath hai . trp kai sath hai ,ya sarkar kai sath ,ya janta kai sath hai . ya videshi yon kai sath hain. kirpiya is par ko e blog bahjain. chandsingh009@gmail.com

के द्वारा:

के द्वारा: Suraj Agrawal Suraj Agrawal

अश्विनी कुमार जी बहुत बहुत धन्यवाद् एक 'आप बीती ' उदहारण सहित अपने विचार ब्यक्त करने के लिए . हमारे भ्रस्ट सरकारी तंत्र में एक नहीं अनेक मामलात ऐसे है जिन्हें इस तकनिकी युग में बड़ी ही सुगमता के साथ ठीक किया जा सकता है , लेकिन भारत के सम्बिधान को बने ६० दसक से ऊपर हो चुके है और इस ६० दसको में तकनिकी कितना बदलाव आ चूका मगर उस लिहाज़ से कानून में कोई खास बदलाव नहीं किया गया , और न ही हमारी सरकार नई तकनीको का प्रयोग निहायत ही गंभीर व सम्बेद्नशील सरकारी महकमो में करना चाहती है . जिसका सीधा सा अर्थ है कि देश सर उठा चुके भ्रस्टाचार रूपी राख्यस का बल भी बांका हो और न ही वो कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी वो अपने सर लेना चाहती है . अब बेहद जरुरी हो गया है देश के हर एक आम ब्यक्ति के बिच जन सचेतना जाग्रत किया जाय. उसे इस बात कि पूरी जानकारी दी जाय कि हमारे देश के सत्ताधारियो व नौकरशाहो द्वारा उसे किस प्रकार से छला जा रहा है , नोचा जा रहा है और लूटा जा रहा है . यही है हमारा जनजागरण अभियान . यदि सरकार चाहे तो देश के हर एक आम जन को पूरी सुरख्या और शांति के साथ बेहतर जिंदगी दे सकती है . धन्यवाद् कृपया जनजागरण अभियान के सभी लेखो को अपने सभी सोसिअल साईट पर मित्रो के बिच अनुप्रेसन कर

के द्वारा: Suraj Agrawal Suraj Agrawal

स्नेही सूरज जी ,,,,आपने एफ़० आई० आर० का जो मुद्दा उथया है बहुत ही सार्थक मुद्दा है,,हालांकि पुलिस महकमे का नपा तुला जबाब होता है की सारे पुलिस वाले भ्रस्ट नही होते एकदम सच है हजार में एक देश भक्त भी होते हैं लेकिन इन एक से पुलिस महकमे की विश्वसनीयता स्थापित होने से रही ,,आपने अपने लेख में मोबाईल चोरी का प्रसंग लिखा है ,,खुद के सामने घटी एक घटना को आपके स्म्क्छ रख रहा हूँ जिस टायर वाले के यहाँ मे अपनी गाडी में हवा भरवाता हूँ उस के यहाँ चोरी हो गयी चोर नकदी एवं सामान के साथ उसका मोबाईल भी उठा ले गये ,,वह थाने के चक्कर लगाता रहा की उसकी एफ़० आई० आर० दर्ज हो जाए इस चक्कर में वह अपने सामान को भूलकर केवल मोबाईल की ही प्रथिमिकी दर्ज करवाने तक पर समझौता कर चुका था लेकिन सरकारी अमलदारी हर बार उसे डांट कर भगा देती ,,बेचारा एक कागज़ एक ऐसा कागज़ जिससे की उसके पास सबूत हो जाता की उसकी मोबाईल वास्तव में चोरी हुई है के चक्कर में वह चार पांच दिनों तक थाने के चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी प्रथिमिकी दर्ज नही हो पायी ,एक शाम मै गाडी में हवा भरवाने उसके यहाँ पहुंचा वह उसका जिक्र कर बैठा और मिन्नत करने लगा कि उसकी एफ़० आई० आर० दर्ज करवा दूँ क्योंकि उसे डर था की उसके मोबाईल की वजह से वह किसी बड़े अजाब में न फंस जाए मै उसे साथ लेकर थाने में गया पचास का नोट पहले ही रख कर उन्हें घटना का ब्योरा दे कर उसकी अर्जी टेबल पर रख दिया मुंशी ने आनन फानन में पचास का नोट जेब के हवाले करते हुए अर्जी की एक कांपी पर मुहर मार कर दे दिया ,,वह कागज़ उसके हाथ में पंहुचने के बाद उसके जान में जान आई ,,मै भी भ्रष्टाचार में शरीक हो गया लेकिन कोइ चारा नही था या तो उस एक एफ़० आई० आर० के चक्कर में मै अपना की दिन दौड़ भाग में बिता देता या फिर उसके पचास के नोट की बलि दिलवा देता जो की अधिक सुविधाजनक था मेरे लिए भी और उसके लिए भी क्योंकि दौड़ भाग में पचास के नोट में एक या दी जीरो और अधिक बढ़ जाते और हासिल वही ढ़ाक के तीन पात........................................सारे तन्त्र को बदलने की जरूरत है अन्यथा कुछ सार्थक नही होगा ........जय भारत

के द्वारा:




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